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छत्तीसगढ़ में पढ़-लिख के घलो हाथ खाली: प्रोफेशनल डिग्री धारी 4.7 लाख युवा बेरोजगार, आंकड़ा मन डरावत हें

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छत्तीसगढ़ में पढ़-लिख के घलो हाथ खाली: प्रोफेशनल डिग्री धारी 4.7 लाख युवा बेरोजगार, आंकड़ा मन डरावत हें

Chhattisgarh Unemployment : रायपुर। छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े डिग्री धारे के बाद घलो लइका मन ला नौकरी-चाकरी बर भटकना पढ़त हे। प्रदेश के रोजगार कार्यालय मन ले जे आंकड़ा आगू आए हे, ओहा बहुत चिंताजनक हे। 31 जनवरी तक के रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 15.79 लाख पढ़े-लिखे बेरोजगार मन पंजीयन कराए हें, जेमां ले करीब 30% यानी 4.7 लाख युवा अइसन हें जिनके पास इंजीनियरिंग, एमबीए अउ बीएड जैसी बड़े प्रोफेशनल डिग्री हे, फेर हाथ खाली हें।

विधानसभा में दे गे जानकारी के अनुसार, साल 2024-25 में रोजगार खोजे वाला मन के संख्या 13,94,727 रिहिस, जेहा 2025-26 में बढ़ के 15,79,178 हो गे हे।

तकनीकी डिग्री धारी मन के हालत सबले खराब

रिपोर्ट के मुताबिक, बीई, बीटेक, आईटीआई अउ डिप्लोमा करे बेरोजगार मन के संख्या 3,59,510 हे। एकर मतलब ये हे कि लइका मन करा हुनर (Skill) तो हे, फेर बाजार में ओ मन बर जगह नइ बन पावत हे।

रोजगार मेला घलो नइ आवत हे काम

जिला स्तर में लगे वाला रोजगार मेला मन के नतीजा घलो कोनो खास नइ हे। मेला में आवे वाला प्राइवेट कंपनी मन 10 ले 12 हजार रुपया के तनख्वाह दे के बात करथें। एही कारण हे कि इंजीनियर अउ एमबीए करे लइका मन अब रोजगार मेला ले दूरी बनावत हें। कम पइसा के सेती कतको झन के चयन होय के बाद घलो उमन नौकरी ज्वाइन नइ करंय।

शिक्षा अउ रोजगार में नइ हे तालमेल

प्रदेश में इंजीनियरिंग अउ पॉलिटेक्निक कॉलेज मन में सीट तो बढ़ गे हे, फेर नौकरी के मौका ओ हिसाब ले नइ बढ़िस। पिछले दू साल में पांच नवा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज घलो शुरू होय हे, फेर बेरोजगारी के समस्या जस के तस हे।

का कहिथे युवा मन के पीड़ा?

  • केस-1 (दुर्ग): तीन साल ले बीटेक करके भटकत श्याम ह बताइस कि कंपनी मन अनुभव मांगथें या फेर 12-15 हजार के नौकरी देथें। अतका कम पइसा में दूसरा सहर में रहना-खाना संभव नइ हे।

  • केस-2 (रायपुर): बीएड करे प्रीति साहू ह शिक्षक भर्ती के अगोरा करत हे। अक्टूबर 2026 में व्यापमं के परीक्षा तो घोषित हे, फेर विषय मन के जानकारी नइ होय के सेती असमंजस के स्थिति बने हे।

एक्सपर्ट व्यू: डॉ. जवाहर सूरिसेट्टी (शिक्षाविद)

डॉ. सूरिसेट्टी के कहना हे कि कॉलेज मन में अभी घलो पुराना पाठ्यक्रम (Syllabus) पढ़ाय जावत हे, जबकि इंडस्ट्री के जरूरत बदल गे हे। जादातर युवा मन सरकारी नौकरी के पाछू भागथें अउ निजी क्षेत्र के मौका ला छोड़ देथें। सरकारी परीक्षा के तैयारी में कतको साल निकल जाथे, जेकर से अनुभव अउ स्किल दूनों खराब हो जाथे। कोर्स ला नवा जमाना के हिसाब ले बदले के जरूरत हे।

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