छठ महापर्व मं आस्था के उमंग – रायपुर, बिलासपुर अऊ अंबिकापुर के घाट मं गूंजे छठ गीत
छत्तीसगढ़ मं आज छठ महापर्व के पावन अवसर मं भक्ति अऊ आस्था के लहर देखे ला मिलिस. रायपुर, बिलासपुर, अऊ अंबिकापुर समेत पूरे राज्य के घाट मं बिहान सबेरे उगते सुरज ला अर्घ देके व्रतियन मन आपन 36 घंटा के निर्जला उपवास ला पूरा करे हवंय.
छठ मइया के जयघोष अऊ पारंपरिक गीतन के गूंज मं पूरा माहौल भक्ति मय होगे रहिस. महिलामन नई-नवा कपड़ा पहिरी के, सिर मं पूजा के टोकरी धरे, घाट ले सुरज भगवान ला अर्घ देत रहीं.
रायपुर के घाट मं उमड़े श्रद्धालु
राजधानी रायपुर के महादेव घाट, कुशालपुर तालाब अऊ टाटीबंध इलाका मं हजारों श्रद्धालु मन जुटे रहिन. सबेरे सुरज उगने के पहिले लेच लोगन मन घाट मं पहुंचे रहिन. मउसमी ठंडक अऊ घाट के सजावट पूरा वातावरण ला पावन बना दे रहिस.
बिलासपुर अऊ अंबिकापुर मं भी देखे गीस भक्ति के रंग
बिलासपुर के अरपा नदी किनारा अऊ अंबिकापुर के बतरा तालाब मं भी भारी भीड़ रहिस. अइसने मं छठ गीतन के मिठास, ढोलक के थाप अऊ श्रद्धा के भाव सबला अपन बनाय रखे रहिस.
महिलामन मनोकामना पूर्ति बर छठी मईया ले प्रार्थना करिन – “छठी मईया, घर परिवार मं सुख-शांति रहय, अपन कृपा बनाए रखव.”
निर्जला व्रत पूरा, अब घर मं प्रसाद के वितरण
अर्घ देके व्रतियन मन अपन उपवास पूरा करे हवंय. पूजा के बाद ठेकुआ, कद्दू-भात अऊ गुड़ के प्रसाद घर-घर बांटे गीस. परिवार अऊ समाज के लोगन मन एक दुसरे ला छठ पर्व के बधाई देत रहिन.
आस्था, अनुशासन अऊ पवित्रता के प्रतीक
छठ महापर्व सिरिफ पूजा नइए, ये एक अनुशासन अऊ आत्मसंयम के पर्व आय. 36 घंटा ले बिना जल ग्रहण करे रहना, प्रकृति अऊ सुरज भगवान बर समर्पण के प्रतीक आय. छत्तीसगढ़ मं अब छठ पूजा सिरिफ बिहार-पूर्वांचल नइ, बल्कि हर घर-परिवार के उत्सव बन गे हवय.
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